नई दिल्ली: राष्ट्रीय शैक्षणिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यक्रम ढांचा 2023 के अनुरूप विद्यालयों के लिए नई पाठ्यपुस्तकें जारी की हैं। इन पुस्तकों में भारतीय इतिहास, वैज्ञानिक परंपरा, अंतरिक्ष अभियानों और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विषयों को प्रमुखता दी गई है। 1961 में स्थापित एनसीईआरटी का उद्देश्य विद्यालयी शिक्षा की गुणवत्ता सुधारना और केंद्र व राज्य सरकारों को पाठ्यक्रम संबंधी सलाह देना है। परिषद पहले ही कक्षा 1–2 (2023) और कक्षा 3–6 (2024) की नई किताबें जारी कर चुकी है, जबकि अब कक्षा 4, 5, 7 और 8 के लिए भी नई पुस्तकें लाई जा रही हैं।
नई सामाजिक विज्ञान पुस्तकों में इतिहास और संस्कृति से जुड़े कई बदलाव किए गए हैं। इनमें प्राचीन भारतीय राजवंशों, धार्मिक यात्राओं और सांस्कृतिक परंपराओं को शामिल किया गया है। “How the Land Became Sacred” नामक अध्याय में 12 ज्योतिर्लिंग, चारधाम, शक्तिपीठ और कुंभ मेले जैसी परंपराओं का उल्लेख किया गया है। साथ ही औपनिवेशिक काल में भारत के संसाधनों के शोषण और आर्थिक प्रभावों पर भी चर्चा की गई है।

गणित और विज्ञान की किताबों में भारतीय वैज्ञानिकों और दार्शनिकों को भी जोड़ा गया है। कक्षा 8 की गणित पुस्तक में बौधायन के त्रिभुज संबंधी सिद्धांत का उल्लेख है, जबकि विज्ञान की किताब में आचार्य कणाद के परमाणु सिद्धांत को समझाया गया है। इसके साथ पारंपरिक चिकित्सा से लेकर कोविड-19 टीकों तक के विकास को भी जोड़ा गया है। नई पुस्तकों में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के मिशनों—चंद्रयान-1, चंद्रयान-2, चंद्रयान-3, मंगलयान और आदित्य-एल1—का भी विवरण दिया गया है, ताकि छात्रों में विज्ञान और अनुसंधान के प्रति रुचि बढ़े।
भाषा की पुस्तकों में प्रेरक व्यक्तित्वों की कहानियां शामिल की गई हैं। कक्षा 8 की अंग्रेजी पुस्तक में परमवीर चक्र विजेता मेजर सोमनाथ शर्मा, ‘दूध क्रांति’ के जनक वर्गीज़ कुरियन और भौतिक वैज्ञानिक बिभा चौधरी की जीवन कथाएं दी गई हैं। इसके अलावा पाठ्यपुस्तकों में लिंग समानता, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक समावेशिता जैसे विषयों को भी महत्व दिया गया है। उदाहरण के तौर पर महिला पायलट, महिला फोटोग्राफर और पंचायतों में महिला नेतृत्व से जुड़े उदाहरण दिए गए हैं।
एनसीईआरटी का कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्य पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक शिक्षा के बीच संतुलन बनाना है, जिससे छात्रों में वैज्ञानिक सोच, सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित हो सके। हालांकि कुछ आलोचकों ने इतिहास के कुछ हिस्सों को कम महत्व देने को लेकर चिंता भी जताई है। फिर भी, परिषद का मानना है कि नई किताबें भारतीय विरासत और आधुनिक उपलब्धियों को संतुलित रूप से प्रस्तुत करते हुए छात्रों में जिज्ञासा, मूल्यबोध और रचनात्मक सोच को प्रोत्साहित करेंगी।
आकांशा खटाना-
